Pragyakunj, Sasaram, BR-821113, India
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Author: Nitin Ahuja

Panchkosh Yoga: A practical tool for "Self Awakening"

पंचकोश जिज्ञासा समाधान (12-08-2024)

आज की कक्षा (12-08-2024) की चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु:- योगशिखोपनिषद् में सम्पूर्ण शरीरों में वायु पश्चिम मार्ग से प्रवेश करता है, रेचक होने पर क्षीण हो जाता है तथा पूरक होने पर उसका पोषण हो जाता है, का क्या अर्थ है प्राण अदृश्य है इसलिए उसे पूर्व (आगे) न कहकर पश्चिम (पीछे) कह दिया …

पंचकोश जिज्ञासा समाधान (13-08-2024)

आज की कक्षा (13-08-2024) की चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु:- योगशिखोपनिषद् में ग्रसित कर देता है तथा सभी दोष उत्पन्न हो जाते है, जब क्षेत्रज्ञ और परमात्मा एक होता है तब साधना के द्वारा उस बह्म में चित्त विलीन हो जाता है, तब ऐसी एकीकरण से प्राण की स्थिरता को प्राप्त हो जाने पर लययोग …

पंचकोश जिज्ञासा समाधान (14-08-2024)

आज की कक्षा (14-08-2024) की चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु:- योगशिखोपनिषद् में आया है कि संसार में दो प्रकार के सिद्धो का वर्णन है कल्पित सिद्ध व अकल्पित सिद्ध परन्तु महायोगी जीवनमुक्त हो जाते हैं इसमें संशय नहीं है, का क्या अर्थ है अकल्पित सिद्ध -> एक स्वभाव से ही शांत है / संत है …

पंचकोश जिज्ञासा समाधान (15-08-2024)

आज की कक्षा (15-08-2024) की चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु:- योगशिखोपनिषद् में आया है कि रम्भा का यह शरीर तीन प्रकार का कहा गया है स्थूल, सूक्ष्म व कारण . . . नाद बीज हिरण्यगर्भ को सूक्ष्म कहा गया है का क्या अर्थ है तथा कारण शरीर का भी वर्णन नही है केवल दो शरीरो …

पंचकोश जिज्ञासा समाधान (14-06-2024)

आज की कक्षा (14-06-2024) की चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु:- भूदेवोपनिषद् में आया है कि दाएं अंग से सृष्टि, बाए अंग से स्थिति तथा मध्य अंग से संहार होता हैं, का क्या अर्थ है दाया अंग = आत्मिकी / Dominant – > वह प्राण जो सारी सृष्टि को control करता है ईश्वर की इच्छा होगी …